उत्तराखण्ड

भारतीय सेना के जवान और गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सेवादारों ने गोविंदघाट से श्री हेमकुंट साहिब तक ट्रेक रूट की रेकी की

देहरादून

भारतीय सेना के जवान और गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सेवादारों ने गोविंदघाट से श्री हेमकुंट साहिब तक ट्रेक रूट की रेकी की

गोविंदघाट, ५ अप्रैल २०२६: भारतीय सेना के जवानों और गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सेवादारों ने संयुक्त रूप से गोविंदघाट से श्री हेमकुंट साहिब तक ट्रेक रूट की रेकी (पुनरीक्षण) की।

रेकी के दौरान पाया गया कि श्री हेमकुंट साहिब में लगभग पाँच से छह फीट तक बर्फ जमी हुई है। मार्ग में अलककोटी ग्लेशियर पॉइंट (Atlakoti Glacier Point) पर भी काफी मात्रा में बर्फ मौजूद है।

सकारात्मक बात यह है कि पिछले दस दिनों में जो ताज़ा बर्फ गिरी है, वह यदि आने वाले दिनों में धूप निकली तो आसानी से पिघल जाएगी। इससे ट्रेक रूट को साफ करने और यात्रा शुरू करने में सुविधा होगी।

भारतीय सेना की टुकड़ी १५ अप्रैल के बाद रवाना होगी, जो यात्रा मार्ग पर जमी बर्फ को हटाने का कार्य करेगी, ताकि कपाट खुलने से पहले रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और यात्री-friendly हो सके।

श्री हेमकुंट साहिब सिख धर्म का एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जो हिमालय की गोद में स्थित है। यह स्थान अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। चारों ओर बर्फ से ढके ऊँचे शिखर, नीले पानी का पवित्र सरोवर, घने जंगल और अलौकिक शांति इस जगह को स्वर्ग से कम नहीं बनाती। यात्रियों को यहाँ प्रकृति की अद्भुत छटा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

श्री हेमकुंट साहिब यात्रा इस वर्ष २३ मई २०२६ से शुरू हो रही है। पहला जथा २० मई २०२६ को ऋषिकेश से रवाना किया जाएगा।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट और भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि यात्रा को सुगम, सुरक्षित और निर्विघ्न बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ की जा रही हैं। दोनों पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

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