उत्तराखण्ड

धन धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का 422वां पहला प्रकाश दिहाड़ा बड़ी श्रधा व धूमधाम से मनाया गया

देहरादून गुरूद्वारा श्री गुरु हरि राय साहिब जी (सातवीं पातशाही) टी एच डी सी कालोनी, देहरा खास, देहरादून में 422वां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश दिहाड़ा टी. एच. डी. सी. कालोनी, देहरा खास की संगतो द्वारा बड़े धूमधाम व श्रधा से मनाया गया जिसमें सभी धर्मो के लोगों ने हाजरी भरी*।

*इस पावन प्रकाश दिहाड़े के अवसर पर सुबह 04.45 बजे से 08-45 बजे तक विशेष दीवान सजाया गया जिसमें *सर्वप्रथम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश, नितनेम, श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ व आसा दी वार व कीर्तन होया*।

*सर्वप्रथम गुरु घर के प्रसिद्ध रागी भाई सोहन सिंह जी व भाई जसवीर सिंह जी द्वारा शबद ” सौ सतिगुरु पिआरा मेरै नालि है जिथै किथै मैनौ लई छडाई।।* ” अते *जिस नौ तेरी मिहर सु तेरी बंदिगी ।।* का गायन कर संगतो को निहाल किया।

इस मौके पर गुरुद्वारा के *प्रधान एच0 एस0 कालड़ा * द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का इतिहास पर प्रकाश डाला और बताया*श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है,* *जिसे गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में संकलित किया था।* *गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में अमृतसर में गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन किया। इसमें उन्होंने पहले चार सिख गुरुओं (गुरु नानक देव जी, गुरु अंगद देव जी, गुरु अमर दास जी और गुरु राम दास जी) के लेखन के साथ-साथ अन्य संतों और भगतों के लेखन भी शामिल किए।*

*श्री गुरु ग्रंथ साहिब में 1430 अंग है इसमें पवित्र शबद, प्रार्थनाएं और शिक्षाएं हैं। इसमें मूल मंत्र, जपजी साहिब और अन्य रचनाएं शामिल हैं जो सिख दर्शन की नींव हैं। जहाँ तक इसके महत्व की बात करें तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों के लिए अंतिम आध्यात्मिक प्राधिकरण और मार्गदर्शक माना जाता है। इसे गुरुओ का जीवंत शबद माना जाता है और इसका अत्यधिक सम्मान और भक्ति के साथ इलाज किया जाता है।*

*श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाशन 1604 में हुआ था, और इसका संकलन सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। तब से यह कई भाषाओं में अनुवादित किया गया है और दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बन गया है। गुरु ग्रंथ साहिब एक कालातीत और सार्वभौमिक ग्रंथ है जो लोगों को उनके आध्यात्मिक यात्रा में प्रेरित और मार्गदर्शन करता रहता है। इसकी शिक्षाएं भक्ति, करुणा और निस्वार्थ सेवा के महत्व पर जोर देती हैं, और इसका प्रेम, समानता और न्याय का संदेश सभी वर्गों के लोगों के साथ प्रतिध्वनित होता है।*

*गुरु ग्रंथ साहिब जी ने हमें सत्य, करुणा और सेवा का मार्ग दिखाया।*

*श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का ज्ञान हमें सिखाता है कि समाज सेवा ही सच्ची भक्ति है। दूसरों की मदद करना, समानता का आदर करना और बिना किसी भेदभाव के सबकी सेवा करना ही मानवता का मूल उद्देश्य हैं।*

*गुरु साहिब जी ने दुःखीयो का दर्द भी मिटाया है*।

*दीवान की समाप्ति के उपरांत गुरु का अतुट प्रसाद व मिष्ठान वरताया गया।*

*इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य परवीन मल्होत्रा, नरेश सिह खालसा, कुलदीप सिंह, रंजीत कौर, विनय किंगर व हरजीत सिंह*आदि मौजूद रहे व पूरा पूरा सहयोग दिया*

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